अभी से दो वर्ष पहले ही कुंभ 2027 को लेकर सरकारी तंत्र पूरी तरह सक्रिय हो गया है। रेलवे ने अतिरिक्त ट्रेनों की योजना तैयार कर ली है ताकि यात्रियों को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े। पर्यटन विभाग भी अस्थायी ठहरने की व्यवस्थाओं का खाका तैयार कर रहा है। वहीं, हजारों कल्पवासी भी अपनी तैयारियों में जुटने लगे हैं। जी हां, कुंभ 2027 की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और इस बार प्रशासन ने काम की रफ्तार पहले से कहीं ज्यादा तेज कर दी है, जिससे आयोजन भव्य और सुव्यवस्थित होने की उम्मीद है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल जो हर श्रद्धालु के मन में कौंध रहा है, वह यही है – कुम्भ 2027 कहाँ लगेगा? क्या यह इलाहाबाद (अब प्रयागराज) की तरफ है, या फिर उज्जैन की ओर? आइए, जानते हैं इस पवित्र भौगोलिक पहेली का उत्तर और कैसे एक सुव्यवस्थित तीर्थ यात्रा योजना यात्रा को आसान बनाएगी।
इसे समझना जरूरी है कि कुंभ 2027 की तैयारियां शुरू क्यों इतनी महत्वपूर्ण हैं,
1. हरिद्वार
2. प्रयागराज
3. उज्जैन
4. नाशिक
ग्रहों की स्थिति के अनुसार यह चक्र हर 12 साल में पूरा होता है। 2027 में यह आयोजन हरिद्वार में होगा। हाँ, आपने सही पढ़ा। अगला कुंभ मेला उत्तराखंड के पवित्र नगर हरिद्वार में लगेगा। जब बृहस्पति कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे और सूर्य मेष राशि में होंगे, तब हरिद्वार के हर घाट पर आस्था का उफान आएगा। यही वह समय होगा जब लाखों लोग हर-हर गंगे के जयकारों के साथ गंगा में डुबकी लगाएंगे। इसलिए अभी से भीड़ का अनुमान लगाते हुए, जल विभाग से लेकर यातायात पुलिस तक, हर विभाग ने अपनी कमर कस ली है।
कुंभ मेले का स्थान और समय ग्रहों की स्थिति के आधार पर तय होता है। ज्योतिष के अनुसार, जब बृहस्पति कुंभ राशि में और सूर्य मेष राशि में होते हैं, तब हरिद्वार में कुंभ मेला आयोजित किया जाता है। इस बार यह दुर्लभ संयोग 2027 में बन रहा है। पिछली बार हरिद्वार में कुंभ 2021 में हुआ था — वो भी कोरोना महामारी की वजह से सीमित रूप में। इसलिए 2027 का कुंभ उन लाखों श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास होगा, जो 2021 में नहीं जा पाए थे।
इस बार पूरी तैयारी के साथ और बड़े पैमाने पर इस मेले को मनाने की योजना है, साथ ही रहने की सुविधाओं के विभिन्न विकल्पों की जानकारी पहले से ही उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि श्रद्धालु आसानी से अपनी यात्रा की योजना बना सकें।
जरा सोचिए: दस करोड़ से अधिक लोग एक छोटे से शहर में आते हैं। वह भी कुछ विशेष स्नान पर्वों (शाही स्नान) के दिनों में। सामान्य समय में हरिद्वार की हर गली संकरी पड़ जाती है; कुंभ में तो यह हर गली सड़क बन जाती है और हर सड़क मेला।
प्रशासन ने कुंभ 2027 की तैयारियां शुरू करते हुए तीन बड़े बदलाव किए हैं:
हरिद्वार के आसपास 2,000 हेक्टेयर से अधिक जमीन को चिन्हित किया गया है। यहाँ अस्थाई अस्पताल, पुलिस चौकी, बैंक, और यहाँ तक कि पोस्ट ऑफिस भी बनाए जाएंगे। यह एक चलता-फिरता शहर होगा, जो दो महीनों में बसेगा और फिर गायब हो जाएगा।
पिछले कुंभ में जल प्रदूषण एक बड़ी समस्या बनी थी। इस बार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आदेश दिया है कि जो भी अस्थाई कैंप लगेंगे, उनका गंदा पानी टैंकरों से उठाकर ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुँचाया जाएगा। गंगा में केवल वही प्रवेश करेगा जो 100% शुद्ध हो।
पिछली बार भीड़ में लोग खो गए थे, बच्चे बिछड़ गए थे। इस बार 500 से अधिक AI-आधारित कैमरे लगेंगे जो न सिर्फ भीड़ गिनेंगे, बल्कि गिरते हुए व्यक्ति या भगदड़ जैसी स्थिति को पहले ही भांप लेंगे। एक केंद्रीय कंट्रोल रूम 24x7 इस डेटा को मॉनिटर करेगा।
अब बात सबसे अहम हिस्से की – आप कहाँ रुकोगे? कुंभ के दौरान हरिद्वार के होटल आम लोगों की जेब से बाहर हो जाते हैं, वह भी बिना किसी गारंटी के। ऐसे में विशेषज्ञ हमेशा सलाह देते हैं कि अपने प्रवास की बुकिंग पहले से कर लें। अगर आप सोच रहे हैं कि इस बार के आयोजन में कैसे ठहरें, तो आपको यह जानकर खुशी होगी कि कई ट्रैवल ऑपरेटरों ने अपनी सेवाओं को ऑनलाइन कर दिया है। आप अभी से टेंट या धर्मशाला, दोनों के विकल्प चुन सकते हैं।
इसके लिए आप हरिद्वार में कुंभ के ठहरने के बेहतरीन विकल्प पहले से देख सकते हैं। वैसे, अगर आप बाद में दक्षिण भारत के किसी मेले में जाने की सोच रहे हैं, तो महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र की व्यवस्थाओं से तुलना करना भी सही रहेगा। 2027 में पूरा फोकस हरिद्वार पर है।
हरिद्वार रेलवे स्टेशन देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। कुंभ के दौरान 'कुंभ स्पेशल' ट्रेनें चलेंगी, लेकिन टिकट संघर्ष का विषय बन सकता है। इसलिए कोशिश करें कि IRCTC की वेबसाइड पर अलर्ट लगा लें।
दिल्ली से हरिद्वार 5–6 घंटे दूर है। पार्किंग की कमी के कारण कार से यात्रा न करें।
सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा देहरादून है, जहाँ से हरिद्वार सिर्फ 35 किलोमीटर दूर है। इस बार देहरादून से हरिद्वार के लिए हेलिकॉप्टर सेवा की योजना है, जिससे बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को आसानी होगी। ऐसे में कई यात्री हरिद्वार कुंभ यात्रा के आसान पैकेज विकल्प भी चुन रहे हैं।
जब कुंभ 2027 की तैयारियां शुरू हुई हैं, तो कुछ नए आयाम भी जुड़े हैं:
A: कुंभ 2027 हरिद्वार में लगेगा, जहाँ हर की पौड़ी पर करोड़ों श्रद्धालु गंगा स्नान करेंगे।
A: 2025 के महाकुंभ के बाद से ही उत्तराखंड सरकार ने हरिद्वार कुंभ 2027 की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
A: आधिकारिक तिथियां जल्द घोषित होंगी। मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और महाशिवरात्रि प्रमुख स्नान पर्व होंगे।
A: दिल्ली से ट्रेन, बस या सड़क मार्ग से हरिद्वार पहुँचा जा सकता है, और निकटतम हवाई अड्डा देहरादून है।
A: हाँ, कुंभ के दौरान भारी भीड़ होती है, इसलिए आवास और यात्रा की बुकिंग पहले से करना बेहतर रहेगा। इसके साथ ही, Epic Yatra के जरिए आप अद्भुत यात्राओं का आनंद ले सकते हैं।